1. चना हावय त दांत नई, दांत हे त चना नई – अवसर न मिलना 2. चारी गोठ छिटका पानी– अपयश 3. जिहा जिहा दार भात, तिहां तिहां माधोदास– परभोगी, लालची। 4. जात न गोठ बइठे ला मंझोत – अपरिचित का सम्मान। 5. जतका मुड़ी ओतके हांड़ी– परिवार का विघटन । 6. जांगर के चलत ले– स्वयं पर भरोसा । 7. जरे म नुन डारे अउ आँसू टपकाय– दुःख में और दुःखी । 8. जेकर खाये, तेकर गाय– उपकार मानना । 9. डोरी जर जाथे तभो ले आंट नइ जावय – अहंकार नष्ट न होना 10. तीन तिखार महा विचार– अंतिम निर्णय 11. तेली घर तेल हे त पहार ल नइ पोतय -अधिकता का अपक्षय न करना। 12. थोरहे के झांझ, बहुते के मंजीरा– अनावश्यक बातें करना। 13. दीया बर तेल नहीं मेछा बर आंतर तेल– अनावश्यक खर्च। 14. दु बेटा राम के, कौड़ी के ना काम के– पुत्र सुख से वंचित । 15. नवा बईला के चिक्कन सींग– नयी वस्तु में आकर्षण । 16. न गांव म घर न खार मा खेत– भूमिहीन । 17. नाउ मरगे त मुड़ कोन मुड़ही– अभाव में कार्य का रूकावट। 18. नीम के छाँव, महतारी के पाँव -पर्यावरण का समर्थन 19. कुटहा करम के फुटहा दोना, पेज गवाँगे चारों कोना– अभागे को सहारा न मिलना। 20. बाँह भरोसा तेकर तीन परोसा– कर्म का फल मीठा होना। 21.बासी के नून कभू नई हिटय -दूसरे का हक में गया पुनः प्राप्त नहीं होता है। 22.भलई के संसार नई -उपकार का जमाना नहीं है। 23. भाई बांटा– बराबर हिस्सा। 24. मन भर धावय, करम भर पावय-परिश्रम का प्रतिसाद मीठा होता है। 25. राम-राम के बेरा ले-सुबह का समय । 26. रोटी खाये टोर के, गोठ करे जोड़ के-सोच कर कार्य या बातें करना। 27. रोय म राम नइ मिलय – रोने से कुछ नहीं मिलता। 28. लगे भंइस के चसका ता छेरी दुहे न जाय-अधिक लाभ की चाह । 29. लात के देवता, बात म नइ मानय– धूर्त को सजा ही सही। 30. हिजगा म बाबू नइ जनमय– नकल से महानता नहीं मिलती। 31. हींग लागे न फिटकारी-सुगमतापूर्वक कार्य का होना।
32. हपटे बन के पथरा, फोर घर के सील– किसी का गुस्सा किसी पर उतारना । 33. भात खाय बर करछुल नई , फेर मार तलवार– अभाव में भी शान दिखाना । 34. तेल न तेलई, बरर -बरर नरियई -ऐसी इच्छा जो पूरी न हो। 35. मही मांगे बर जाय, पछोत मा ठेकवा लुकाय-झूठी दिखाना । 36. कतको अहिरा पिंगला पढ़े,बारा भूत के चाल चले -पुरानी आदतें नहीं छूटती 37. धूर माँ सूते, अउ सखा के सपना-हैसियत से अधिक आशा लगाना । 38. अँधवा हर लाठी ल एक पइत गँवाथे– पुनः धोखा न खाना । 39. अपन रीस हर अपने ल खाथे– क्रोध से हानि। 40.अंधवा गुरू भैरा चेला– यथा मेल । 41. अस्सी कोस नौ बासा, कोन करे तमाशा-दूरस्थ जीविकोपार्जन से कतराना । 42. अण्डा बन म बिर्रा बाघ– जैसा राजा वैसी प्रजा। 43. आने के आँखी म नींद न आवय– स्वयं से ही कार्य पूर्ण होता है। 44. आँखी देख माछी नइ लीले– जानबूझ कर गलती नहीं करना चाहिए । 45. ओरी के छाँव-क्षणिक सुख, महिमा वैभव । 46. कब बबा मरही, त कब बरा खाबो-व्यर्थ ही उम्मीद में पड़ना जीना 47. करम के नांगर ल भूत जोते– भाग्यशाली होना । 48. करनी दिखथे मरनी के बेरा– व्यक्ति को कर्म का फल जीवन में ही मिलता है। 49. काम निकलगे मोर, सतौरी धरौं तोर-स्वार्थी होना । 50. कान्हा ल भावय नई, कान्हा बिन रहे नई -काम में आलसी, भोजन में होशियार । 51. कुकुर गंगा जाहीं त पतरी ल कोन चाटहीं– अयोग्य को सामर्थ्य दिखाना 52. कति के राजा मरिस त आये हव– बहुत दिनों के बाद दिखाई देना। 53. कउआँ कान ल लेगे त ओकर पाछु झन दउड़-अफवाहों में ध्यान न देना। 54. खिलाड़ी खोजे छाँव ता माछी खोजे घाव-अवसर की प्रतीक्षा करना । 55. गरजे बाघ धरे नई , गरजे बादर बरसे नहीं, अउ भूके कुकुर चाबे नई -कथनी और करनी में अंतर होना । 56. गाय न गोरु सुख सुते हरु -निश्चित जीवन जीना। 57. चलनी मा दूध दुहे, भाग ला दोस देवे– कर्म को न पहचानते हुए कार्य करना। 58. सइगोन ह कतको सर जाही एक पाचर के काम देबे करही – मूल्यवान वस्तु का मूल्य अंत तक बना रहता है। 59. नवाई के जोगी कलिंदर के माला– नौसिखिए अनोखे काम करते हैं।