कान्तिकार्तिक छत्तीसगढ़ी सेवा जस गीत

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  • तोर जस ल गाँहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म

    तोर पचरा गाँहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म तोर जस ल गाँहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म आजा न आजा मोर ठांव म दाई ।।2।। सुरती म सजाहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म तोर जस ल गाँहु वो दाई एRead More
  • तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव

    तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।। दुई नयना के बाती म ,आंसु म जोत जलातेव ।।2।। तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।। कृपा करथे कृपालु माता , छाती म बोतेव जवारा गंगा जल पानी के बदला, चरन म अंसुवन धारा तोर देवन तन ल माँ , नवRead More
  • बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार

    बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार  ।।2।। रुच मुच कसे हो सिंगार ।।2।। बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार बारामास दाई बरन बरन के , चमके गहना गुरिया चमके गहना गुरिया हो मईया ।।2।। माह असाढ़ ऋतु छुनुर छुनुर दाई, बाह भर बाजे चुरिया बाह भर बाजे चुरिया हो मईया ।।2।। सावन ऋतुRead More
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