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तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

दुई नयना के बाती म ,आंसु म जोत जलातेव ।।2।।

तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

कृपा करथे कृपालु माता , छाती म बोतेव जवारा
गंगा जल पानी के बदला, चरन म अंसुवन धारा

तोर देवन तन ल माँ , नव दिन मंय भेंट चगातेव ।।2।।

तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

संझा बिहनिया रोम रोम ह तोरेच गुन ल गातीस
हाय रे अभागा कंचन काया नाव तोर गोहरातीस

आशा अउ बिस्वासा के ,मंय ह अलख जगातेव ।।2।।

तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

तोर मया के शबरी म दाई सरवन मंय नहातेव
माटी के हंथी माटी घोड़ा तोर भुवन म रेंगातेव

आंगा सांगा पंचमाड़िया ,बाना म देवता नाचातेव ।।2।।

तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

अतके हावय विनती माता अतके हावय अरजी माँ
ये काया तोर लागा छुटतीस बाकी तोर मरजी माँ

कान्तिकार्तिक कहिथे न परमानन्द कठोलिया ल
तोर धरम ध्वजा फहरातेव

तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

दुई नयना के बाती म ,आंसु म जोत जलातेव ।।2।।

तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।।

स्वर : कान्तिकार्तिक यादव
संगीत : ओ. पी. देवांगन
गीत : परमानंद कठोलिया

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