मनखे वो दिन मर जथे | चन्द्रकांत खुंटे ‘क्रांति’
मनखे वो दिन मर जाथे जब ईमान वोकर सर जाथे। गरीबमन ले कांटा मारथे। लूट-खसोट से घर सारथे। ईमानदारी के रद्दा भुला के, टेबुल तरी रिस्वत ओगारथे। मनखे वो दिन मर जाथे जब वोकरजुबान सर जाथे। गुरतुर बोली ल टार डारथे। करु-कस्सा ल धर डारथे। पर-अपन के चिन्हारी भूल दुक के बीजा बो पारथे। मनखेRead More