हाना (कहावत) ल विश्व के निति- साहित्य के अंग माने जाथे। हाना अपन आप म पुरा होथे – जइसे ‘अंधरा म कनवा राजा। हाना मन के स्वतंत्र प्रयोग होथे। हाना…Read More
1. ‘कोस कोस म पानी बदलै, चार कोस म बानी।’ छत्तीसगढ़ी अर्थ- थोर थोर दुरिहा म पानी के सुवाद ह बदल जाथे – ओकर कुछ दुरिहा जाए ले बोली घलो बदल जाथे। (थोड़े-थोड़े दूर में पानी का स्वाद बदल जाता है-उससे कुछ दूर जाने पर बोली बदल जाती है।) 2. ‘नींदे कोड़े खेती, कोरे गाँथेRead More