तिहार

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  • तीजा के उपास म फरहार (फलाहार) के महत्व

    फलाहार के महत्व तीजा के उपास ला माई लोगन मन हर पूरा लगन से रहिथे, बिहनिया ले उठ के नवा–नवा लुगरा,सोलह श्रृंगार कर के भगवान शिव अउ पार्वती माता के पूजा पाठ करथे। अउ अपन पति के लंबा उम्र के कामना करथे।  उपास के दूसरा दिन फलाहार करे जाथे; ये दिन घलो बड़े बिहनिया लेRead More
  • पितर विशेष : प्रिया देवांगन “प्रियू”

    हमर पितर अउ हमर कउँवा पितर पाख ह कुँवार महीना के अंधियारी पाख के एक्कम तिथि ले लेके अमावस तक चलथे। पंदरा दिन तक घरोघर बरा, सोहारी, गुलगुला भजिया, खीर बनाके पुरखा मन ला गुड़ अउ घींव के हुम दे जाथे। बताए हे की गुड़ अउ घी के हुम ला पितर पाथे। पितर पाख माRead More
  • तीजा – पोरा : महेन्द्र देवांगन “माटी”

    तीजा – पोरा के तिहार छत्तीसगढिया सब ले बढ़िया । ये कहावत ह सिरतोन मा सोला आना सहीं हे । इंहा के मनखे मन ह बहुत सीधा साधा अउ सरल विचार के हवे । हमेशा एक दूसर के सहयोग करथे अउ मिलजुल के रहिथे । कुछु भी तिहार बार होय इंहा के मनखे मन मिलजुलRead More
  • करू भात -(तीजा पर्व विशेष) प्रिया देवांगन “प्रियू”

    तीजा के करुभात तीजा–पोरा हा हमर छत्तीसगढ़ के माई लोगन बर विशेष तिहार हरे। राखी के बाद सब के मन मा एक अलग से खुशी झलकथे की अब तीजा –पोरा आही।अउ खुशी होही काबर नहीं साल भर मा एक बार ये तिहार हर आथे। वइसे तो हर तिहार हा एके घाँव आथे, फेर ये तीजाRead More
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