नानकिन किस्सा : दुखी लाल के दुख का बतावँव मैं, येखर मारे अब्बड़ हलाकान होगेंव। संग ला कभू छोड़े नहीं। जिहाँ जाथे उहें धर के लेगथे। मोला लेगे बर सुरता…Read More
देवारी विशेष —————- आलेख : // हमर पुरखौती जिनीस आय देवारी के कुम्हड़ा-कोचई के साग ह // हमर छत्तीसगढ़ म अब्बड़ तिहार मनाये जाथे; अउ मनाना घलो चाही, काबर की तिहार मनाये ले लोगन म मया-दुलार अउ मीत-मितानी बाढ़थे। रोज दिन तो मनखे मन अपन काम-बूताRead More
// दीपावली विशेषांक // आलेख : //हमर गाँव-देहात मा गोबरधन पूजा // हमर छत्तीसगढ़ मा किसम-किसम के तिहार मनाये जाथे; जेमा सब ले बड़का तिहार हवै दीपावली, जेला देवारी तिहार घलो कथे। ये तिहार हर सरलग पाँच दिन तक चलथे। धनतेरस, नरक चौदस, सिरहुती, गोवर्धन पूजा, भाईदूज। गँवई-गाँवRead More
हमर पितर अउ हमर कउँवा पितर पाख ह कुँवार महीना के अंधियारी पाख के एक्कम तिथि ले लेके अमावस तक चलथे। पंदरा दिन तक घरोघर बरा, सोहारी, गुलगुला भजिया, खीर बनाके पुरखा मन ला गुड़ अउ घींव के हुम दे जाथे। बताए हे की गुड़ अउ घी के हुम ला पितर पाथे। पितर पाख माRead More
फलाहार के महत्व तीजा के उपास ला माई लोगन मन हर पूरा लगन से रहिथे, बिहनिया ले उठ के नवा–नवा लुगरा,सोलह श्रृंगार कर के भगवान शिव अउ पार्वती माता के पूजा पाठ करथे। अउ अपन पति के लंबा उम्र के कामना करथे। उपास के दूसरा दिन फलाहार करे जाथे; ये दिन घलो बड़े बिहनिया लेRead More
चिन्हारी : मनखे के जिनगी मा सिक्का एक हाना हवै कि बखत परे मा खोटा सिक्का ही काम आथे। खोटा सिक्का चलगे; माने बिगड़त काम बनगे। अइसना सियान मन कहिथें। खोटा सिक्का के चरचा के आगू बढ़े ले अब बात आथे कि सिक्का हरै का चीज। अब जइसे आम मनखे के जिनगी म धन-सम्पत्ति केRead More
तीजा के करुभात तीजा–पोरा हा हमर छत्तीसगढ़ के माई लोगन बर विशेष तिहार हरे। राखी के बाद सब के मन मा एक अलग से खुशी झलकथे की अब तीजा –पोरा आही।अउ खुशी होही काबर नहीं साल भर मा एक बार ये तिहार हर आथे। वइसे तो हर तिहार हा एके घाँव आथे, फेर ये तीजाRead More