CHHATTISGARHI HANA

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  • दूरिहा के ढोल सुहावन। (हाना)

    दूरिहा के ढोल सुहावन। (हाना) याने : दूरिहा के ढोल ह सुहावन लागथे। ढोल ह दूरिहा ले सुहावन लगाथे। तीर म जाके देखे वोमा पोल दिखई देथे। जब कोनो मनखे के बिना बात के बड़ई होवत रहय अउ वोकर पोल खुल जथे तब ए कहावत ल कहे जाथे। अइसन मनखे दूरिहा ले बने लगथे, तीर मRead More
  • छत्तीसगढ़ी हाना (कहावत)

    1. ‘कोस कोस म पानी बदलै, चार कोस म बानी।’ छत्तीसगढ़ी अर्थ- थोर थोर दुरिहा म पानी के सुवाद ह बदल जाथे – ओकर कुछ दुरिहा जाए ले बोली घलो बदल जाथे। (थोड़े-थोड़े दूर में पानी का स्वाद बदल जाता है-उससे कुछ दूर जाने पर बोली बदल जाती है।) 2. ‘नींदे कोड़े खेती, कोरे गाँथेRead More
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