धान के महिमा
//धान के महिमा// पींयर –पींयर धनहा बाली। बिहना पड़थे सूरज लाली।। घाम अगासा के वो सहिथे। धान सोन कस चमकत रहिथे।। चिरई–चिरगुन गाना गाथे। घेरी–बेरी खेत म जाथे।। पक्का–पक्का बीजा पाथे। फोर–फोर के जम्मों खाथे।। किसम–किसम के धान ल बोथे। अब्बड़ पैदावार ह होथे।। चारों मुड़ा सुघर ममहाथे। देख किसनहा खुश हो जाथे।।Read More
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