सुन्ना मोर गांँव : प्रिया देवांगन “प्रियू”
//सुन्ना मोर गांँव// सुनलव संगी सुनव मितान।देवव थोरिक येती ध्यान।। कलजुग के कर लौ पहिचान। मनखे हावय बड़ परशान।। गिल्ली डंडा फुगड़ी रेल।नइ होवय अब कखरो मेल।। कहाँ लुकागे जम्मों खेल।घर मा खुसरे लगथे जेल।। अब्बड़ सुन्ना लागे खोर।करे नहीं कोनो हर शोर।। राँय राँय के दिन हर आय।गरमी माRead More
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