नानकिन किस्सा (व्यंग)
नानकिन किस्सा : दुखी लाल के दुख का बतावँव मैं, येखर मारे अब्बड़ हलाकान होगेंव। संग ला कभू छोड़े नहीं। जिहाँ जाथे उहें धर के
नई मिठावय नई मिठावय नई मिठावय का वो मोला
नई मिठावय नई मिठावय नई मिठावय का वो मोला ।।2।। नई मिठावय नई मिठावय नई मिठावय ना तिवरा चना भाजी मजेदार करेला करू नई मिठावय
का तै मतौना खवाये मोला वो – विवेक शर्मा जी , कंचन जोशी
ल ल ल ल लाला ला ला ला…. का तै मतौना………… का तै मतौना खवाये मोला वो ।।2।। मैं तोर होगेंव रानी तै मोर होगें
का तै मतौना खवाये मोला वो
का तै मतौना खवाये मोला वो ।।2।। मैं तोर होगेंव रानी तै मोर होगें वो का तै बतौना बताये मोला रे मैं तोर होगेंव राजा
तय मोर मुनगाकाड़ी – कंचन जोशी, सनत गिलहरे (छत्तीसगढ़ी गीत लिरिक्स)
तय मोर मुनगाकाड़ी ये मोर मुनगा के काड़ी मैं तो करिया हव जइसे हाडी तोर बर मन मोर गदगद हे बता गहना लेवव की साड़ी
गनेस वंदना: महेंद्र देवांगन (माटी)
//गनेस वंदना// जय गणेस देवता, पहिली सुमरनी गावँव तोर। गियान बुद्धि के देने वाला, हर ले संकट मोर।। लंबा–लंबा सूंड हाबे
देवारी के सरप्राइज: प्रिया देवांगन “प्रियू”
कहानी : // देवारी के सरप्राइज// “चल घर ओ रघु के दाई। अबड़ बेरा होगे। कल अउ आ जाबोन। भूख घलो लगत हे। अहादे बेरा
छितका के ताव… (माटी के मया)
हमर छत्तीसगढ़ में बड़कन परंपरा अउ मान्यता भरे पड़े है। जेमा ले एक मान्यता जेठौनी के दिन घर के जुन्ना चरिहा, टुकना, पर्रा, सुपा या