छितका के ताव… (माटी के मया)
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हमर छत्तीसगढ़ में बड़कन परंपरा अउ मान्यता भरे पड़े है। जेमा ले एक मान्यता जेठौनी के दिन घर के जुन्ना चरिहा, टुकना, पर्रा, सुपा या बांस ले बने कोनो भी समान जेन रोजमर्रा के बुता के उपयोग म आथे अउ जेन काम में नी आय ओला जलाय जाथे।
अइसे मानना हे की जेठौनी के ही दिन ले जाड़ ह बाढ़ जाथे। पहली के बेरा म बड़ गहिर जाड़ पड़य तेकर ले बचे बर लोगन मन भुर्री बारय अउ भुर्री बारे के ये प्रक्रिया घलो एकरे हिस्सा आय। बड़कन कहानी हे जेमा छुआ छूत, रोगराई भगाए, बुरा शक्ति ले बचे बर, आनी बानी के बात हे। फेर पुरखा ले चलत आत ऐ नेंग ल करना चाही। इही छोटे छोटे रूप ले तो हमर परंपरा जीयत हे।

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