पांच बछर मा एक घव भईया, आथे ये तिहार।। जब मिलथे हम सब ला संगी, नेता चुने के अधिकार।।
चुनई आथे त होथे सबो नेता के मिलना, फेर का-का होथे तेला, अब तो हे गा सुनना।। चुनई आथे ता नेता मन ला आथे जनता के सुरता। बाकी दिन फेंकथे, जईसे फटे चिराय कुरता।।
ईही एक बेरा सरकार बनाना, होथे हमर हाथ। सरकार अईसे बनाबो गा संगी, जेन दीही हमर साथ।। चाहे होवय कांपत सरदी या होवय जेठ महीना, फेर डालना हे वोट तुमनला, भले बोहाय पसीना।।
जब आथे चुनई के बारी, चलथे बड़े-बड़े मुद्दा। चुनई सिराथे ताहन चलथे, सबो अपन-अपन रद्दा।। कतको करही आनी-बानी के वादा,
कतको करही परचार ।। अब तुमन जागव संगी, बनावव सुमत के सरकार।। सुने मा आथे चुनई हरे, लोकतंत्र के तिहार।
बनाबोन अपन सरकार, काबर कि ये हरे हमर संविधानिक अधिकार।।