पीका झन फूटय कभू, मन म मोर अभिमान के। असीस पाववँ सबदिन दाई, छइँहा म रहँव सियान के।।

पीका झन फूटय कभू, मन म मोर अभिमान के। असीस पाववँ सबदिन दाई, छइँहा म रहँव सियान के।। छाँट देबे तैं बन अउ करगा, बगरत

पुरखा सियान के संसो : देख तहूँ मरगेस तोर ब, महूँ मरत हंव मोर बर.

देख तहूँ मरगेस तोर बर,  महूँ मरत हंव मोर बर। कोन?धरही अघुवा बाना,पुरखा मन के शोर बर।। गीता रामायण पढ़ ले, सँसो कर अउ कढ़

आँखी आँखी झुले मईया तोर मोहनी मिरतिया आँखी आँखी झुले (छत्तीसगढ़ी लिरिक्स)

आँखी आँखी झुले मईया…. जय हो ……… आँखी आँखी झुले मईया….।।2।। तोर मोहनी मिरतिया आँखी आँखी झुले माटी मँय लाएंव धरती ल कोड के …

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