पुरखा सियान के संसो : देख तहूँ मरगेस तोर ब, महूँ मरत हंव मोर बर.
देख तहूँ मरगेस तोर बर, महूँ मरत हंव मोर बर। कोन?धरही अघुवा बाना,पुरखा मन के शोर बर।। गीता रामायण पढ़ ले, सँसो कर अउ कढ़ ले। ओखरो मान गुमान बर, सांच के रद्दा गढ़ ले।। देख ले सुन ले,बने चेत लगाके थोरिक गुन ले। सउँहत करम लहुट जथे,बदरा-खखरा फून ले।। देखते-देखत इही बेरा,असल होगे कोदोRead Moreपीका झन फूटय कभू, मन म मोर अभिमान के। असीस पाववँ सबदिन दाई, छइँहा म रहँव सियान के।।
पीका झन फूटय कभू, मन म मोर अभिमान के। असीस पाववँ सबदिन दाई, छइँहा म रहँव सियान के।। छाँट देबे तैं बन अउ करगा, बगरत कतको रोगराई ला। चत्वारत सरलग रहिबे वो,मन पथरा म उपजत काई ला।। :- बीजहा पोठ बनवँ दाई मैं, कोदो कुटकी धान के। पीका झन फूटय कभू, मन म मोर अभिमानRead More