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देख तहूँ मरगेस तोर बर, महूँ मरत हंव मोर बर।
कोन?धरही अघुवा बाना,पुरखा मन के शोर बर।।
गीता रामायण पढ़ ले, सँसो कर अउ कढ़ ले।
ओखरो मान गुमान बर, सांच के रद्दा गढ़ ले।।
देख ले सुन ले,बने चेत लगाके थोरिक गुन ले।
सउँहत करम लहुट जथे,बदरा-खखरा फून ले।।
देखते-देखत इही बेरा,असल होगे कोदो पैरा।
मान गउन बर ठउर-ठउर,पद वाले डारै डेरा।।
सरहा घलो ल आँट के,घूनहा घलो ल छाँट के।
मीठलबरा लगधिरहा मन,बँटवारा करै काट के।।
बड़ सुनेन अउ देखत हावन,इही गोठ के पीरा।
नकली-चकली के पूछँतर, कोन? पूछै हीरा।।
बेरा संग किरिया हे तोला,माटी भाखा मान के।
भीर कछोरा बाँध पागा,अँड़ बजुर छाती तान के।।
मिनेश कुमार साहू