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लहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
फहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
लहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
फहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
जिनगी म उजियार के खातिर
जीव जगत उद्धार के खातिर
मैं जलाहुँ दीया ल गुरुदेव, सतनाम के
बगराहूं मया ल गुरुदेव, सतनाम के
लहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
फहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
1- अंतरा:-/
जात पात म काय धरे हे, मनखे मनखे एक हे
ऊँच नीच के भेद तियागवं, सतनाम ल सरेख के
ऊँच नीच के भेद तियागंव, सत नाम ल सरेख के
भीतर के अंधियार टार के, चक चक ले उजियार हूँ।
लोभ मोह मद मास ले दुरिहा, जिनगी सुग्घर सँवारहूँ।
लोभ मोह मद मास ले दुरिहा, जिनगी सुग्घर सँवारहूँ।
बचेखुचे दिन चार के खातिर
मानवता उपकार के खातिर
मैं जगाहुँ सेवा ल गुरुदेव, सतनाम के
जस गाहुँ महिमा ल गुरुदेव सतनाम के
लहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
फहराहूं धजा ल गुरुदेव, सतनाम के
सत गुरु घासीदास बबा ग, सत सत जोहार हे
धरम-करम कोनो झन छोड़य, तोला मनौती गोहार हे।
धरम करम कोनो झन छोड़े , टोला मनौती हमार हे।
मैं तो सेवक तोर चरण के, निशदिन माँथ नवावव ग
सुख दुख बने रहय जिनगी म, जीव सेवा कर पावव ग
सुख दुख बने रहय जिनगी म, जीव सेवा कर पावव ग
ईश्वर बंधी सार के खातिर
सतनाम रस धार के खातिर
मैं ह पाहुँ ठीहा ल गुरुदेव सतधाम के
मैं जुड़ाहूं जिवरा ल गुरुदेव तोर नाम ले
लहराहूं धजा ल गुरुदेव सतनाम के
फहराहूं धजा ल गुरुदेव सतनाम के
गीत अउ स्वर: ईश्वर साहू बंधी