तय मोर मुनगाकाड़ी – कंचन जोशी, सनत गिलहरे (छत्तीसगढ़ी गीत लिरिक्स)
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तय मोर मुनगाकाड़ी

ये मोर मुनगा के काड़ी मैं तो करिया हव जइसे हाडी
तोर बर मन मोर गदगद हे बता गहना लेवव की साड़ी
मैं तोर मुनगा के काड़ी जइसे तै मोर करिया हाडी
तोर बर मन मोर गदगद हे बतावव न गहना लेवव न साड़ी

माला मोती सोना का लेबे,तोर मन के चल न बाजार ।।2।।
मांगे  बर लाली सिंदूर लेदेबे, सब दिन मिलय तोर प्यार ।।2।।
हाथ बर ले लेबे घड़ी ये मोर फटाका फुलझड़ी ।।2।।
तोर बर मन मोर गदगद हे बता गहना लेवव की साड़ी

ये मयारू पहिरे हव गहना अंग अंग म तोरे नाव के
जियत मरत झन छुटे बंधना जइसे वो राधा श्याम के

तय  मोर मैना पहाड़ी तोला मया करव दिनदहाड़ी ।।2।।
तोर बर मन मोर गदगद हे बता गहना लेवव की साड़ी
तय  मोर मुनगा के काड़ी मैं तो करिया हव जइसे हाडी
तोर बर मन मोर गदगद हे बता  गहना लेवव की साड़ी ।।2।।


स्वर – कंचन जोशी,सनत गिलहरे
संगीत – विवेक शर्मा
गीत- राजू पंकज

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