जेठ महीना म चुटकी बिछिया पहिरे भवानी मईया
पहिरे भवानी मईया हो मईया ।।2।।
देवपुर ले डरेव फूल बरसाए नाचे लंगुरे भईया
नाचे लंगुरे भईया हो मईया ।।2।।
कान्तिकार्तिक तोर शरन मा परमानन्द कठोलिया चरन म
रुच मुच कसे हो सिंगार..बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार ।।2।।
रुच मुच कसे हो सिंगार..।।2।।
बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार ।।4।।
स्वर : कान्तिकार्तिक यादव
संगीत : ओ. पी. देवांगन
गीत : परमानन्द कठोलिया जी