पिलेश्वरी छत्तीसगढ़ी गीत लिरिक्स 2 min read 353 words 1 view https://youtu.be/Jwdmd3tYqjo मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न पइयाँ लागव वो दाई तोर पइयाँ लागव वो ।।2।। मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न तोर दुवारी म अंधरा आवय कल्पत रोवय अंगना म वो कल्पत रोवय अंगना म वो दाई ।।2।। आँखी देदे वो दाई नैना देदे वो ।।2।। मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न तोर दुवारी म बांझन आवय कल्पत रोवय अंगना म वो कल्पत रोवय अंगना म वो दाई ।।2।। लइका देदे वो दाई ललना देदे वो ।।2।। मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न परे बिपत म सब गोहरावत रोवत हे तोर भुवना म वो रोवत हे तोर भुवना म वो दाई ।।2।। कान्तिकार्तिक अउ मिनेश के दुख ल हर ले वो ।।2।। मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न पइयाँ लागव वो दाई तोर पइयाँ लागव वो ।।2।। मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न स्वर : कान्तिकार्तिक यादव संगीत : ओ. पी देवांगन गीत : मिनेश साहु जी Log in to clap and saveWritten byपिलेश्वरीJoin to follow writers Prev Post नौ दिन नवरात जागव. Next Post तोर दया होतिस त.