पिलेश्वरी छत्तीसगढ़ी गीत लिरिक्स 2 min read 224 words 3 views आरुग हे कलसा दाई आरुग बाती वो आरुग दियना जलाए ।।2।। दाई वो आरुग दियना जलाए आरुग दोना चाउर, आमा के पाना वो आरुग फुलवा दाई, नीम के बाना वो नरियर जोड़ा लानेव, हरियर दुबी वो आरुग गोरस दाई, नौघट देवी वो आरुग चंदन लानेव, आरुग बन्दन वो आरुग बिरवा बोवाए,, दाई वो आरुग दियना जलाए अंगना ल लिपे पोते चऊक पुराए वो भुवना के तीरे तीरे कलसा सजाए वो तोर सवांगा धरे हुम चढ़ाए वो सिरजाहु दुर्गा दाई जोत जलाएव वो आरुग चुरी लानेव आरुग फुँदरी वो आरुग चुनरी चड़ाए,,, दाई वो आरुग दियना जलाए आरुग हे कलसा दाई आरुग बाती वो आरुग दियना जलाए ।।2।। दाई वो आरुग दियना जलाए ।।2।। गीत : रामनारायण ध्रुव संगीत :अनुज शर्मा स्वर : अनुज शर्मा Log in to clap and saveWritten byपिलेश्वरीJoin to follow writers Prev Post छत्तीसगढ़ी.in Help Desk Next Post तोर जस ल गाँहु.