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सपना मॅं जेला
सपना मॅं जेला मैं देखत रइथौं, है तैं कहां ओ गोरी
सपना मॅं जेला मैं देखत रइथौं, है तैं कहां ओ गोरी
वो चुनरी लहरावत होही, या कंगना खनकावत होही
मौसम घलो इतरावत होही, जब वो हा मुसकावत होही
सपना मॅं जेला मैं देखत रइथौं, है तैं कहां ओ गोरी….
पैंजन ला छनकावत होही, या बिंदिया ला लगावत होही
ये पवन बतादे मोला, तैं तो फिरथस हर गांव गली
सपना मॅं जेला मैं देखत रइथव, है तैं कहां ओ गोरी ….
चंदा घलो हा झांकत होही, ओकर रुप निहारत होही
संझा के बेरा मा दीया ला वो, जब चौरा मा सजावत होही
सपना मॅं जेला मैं देखत रइथव, है तैं कहां ओ गोरी ….