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का मोहनी ….
हे…….
का मोहनी भराये दाई,तोर गाँव म ।।2।।
तोर गाँव म ।।3।।
का मोहनी भराये दाई तोर गाँव म

डोंगरगढ़ के डोगरी दाई तँय आसान ल लागए
चइत कुँवार के पावन बेरा सबझन जोत जलाए
बंगलामुखी बमलाई कहिके जम्मो झन सोरियाए
सब झन छइयां……
हे……
सब झन छइयां पाए तोर अंचरा के छाव म
का मोहनी भराये दाई तोर गाँव म

तोरे दुवारी सजे हे दाई सुग्घर उड़न खटोला
देखव तोर डेहरी ल दाई बढ़ नई लागे मोला
नवरात्रि के मेला ओ दाई भेट करत हव तोला
ये लाल चुनरिया….
हे…..
ये लाल चुनरिया ओढ़ा के बलि बलिहारी जाऊ मैं
का मोहनी भराये दाई तोर गाँव म

दया मया के तँय बरसइया तँय जग के महतारी
लहरावत हे तोर ध्वजा ह महिमा हे तोर भारी
सेवा करत हव तोर दुलोरिन दाई तोर दुवारी
ये जिनगी करदे…..
हे….
ये जिनगी करदे हावव दाई तोरे पाँव मा
का मोहनी भराये दाई तोर गांव म

तोर गाँव म ।।3।।
का मोहनी भराये दाई,तोर गाँव म ।।4।।

स्वर: अलका चंद्राकर
गीत:
संगीत:माधव चंद्राकर, रामनारायण दुबे

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