झूले नजरे नजर में दाई ।।2।।
झूले नजरे नजर में ओ
माटी के दुर्गा हे महामाई ||2||
कइसे करव तोर बिदाई
लागे करलाई ओ
झूले नजरे नजर में दाई ।।2।।
झूले नजरे नजर में ओ
हु हु हु हु हु ||4||
नौ दिन बर माटी के दुर्गा ,पुतरी अस सम्हर के ओ ||2||
दुर्गा चरन पूजा पावत हे,भइसा सुर मरके हो
बैरी जाम्मर होंगे दाइ,बैरी अम्मर होंगे दाई ।।2।।
चरन पद पाई हो
झूले नजरे नजर में दाई ।।2।।
झूले नजरे नजर में ओ
हु हु हु हु हु ||4||
झलकत हे तोर गहना गुरिया ,आँखि आँखि म झूले ओ ||2||
बघवा ऊपर माता बिराजे ,हाथ धरे तिरशूले हो
झलके रिगबिग रिगबिग माता,दमके रिगबिग रिगबिग माता ।।2।।
रहिबे तय सहाई ओ
झूले नजरे नजर में दाई ।।2।।
झूले नजरे नजर में ओ
हु हु हु हु हु ||4||
घर अंगना बिरान लागे,तोर जाती बिराती हो ||2||
भीतरी भीतरी मन कलपत हे ,अंतस फटे छाती हो
हे दुर्गा अनपूर्णा माई ,होंगे सुन्ना सुन्ना दाई ।।2।।
लागे पहुनाई ओ
झूले नजरे नजर में दाई ।।2।।
झूले नजरे नजर में ओ
हु हु हु हु हु ||4||
बछर भर में लहुट के आबे ,माटी के दुर्गा दाई हो ||2||
चलत चलागन पुरखा पुरातन,किसने करन बिदाई हो
नंद गाँव नंदाई हुलिया,लिखे परमानंद कठोलिया ।।2।।
कान्ति सिरनाई हो
झूले नजरे नजर में दाई ।।2।।
झूले नजरे नजर में ओ
माटी के दुर्गा हे महामाई,कइसे करव तोर बिदाई ||2||
लागे करलाई ओ
झूले नजरे नजर में दाई ||4||
झूले नजरे नजर में ओ
गीत:परमानंद कठोलिया
संगीत:ओ पी देवांगन
स्वर:कान्तिकार्तिक यादव