पिलेश्वरी

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  • तोर जस ल गाँहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म

    तोर पचरा गाँहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म तोर जस ल गाँहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म आजा न आजा मोर ठांव म दाई ।।2।। सुरती म सजाहु वो दाई ए दाई आजा न आजा मोर ठांव म तोर जस ल गाँहु वो दाई एRead More
  • कब होही तोर दरसन मईया कब होही तोर दरसन(छत्तीसगढ़ी लिरिक्स)

    यहो मरना तो हावय सबला एक दिन,कोन ल हावय रहना इही माटी के ओढ़ना ये ओ दाई, इही माटी के बिछौना ।।2।। यहो संझा बिहनिया,तोर ओ माता ||2|| करथव मैं हर सुमिरन… कब होही तोर दरसन मईया कब होही तोर दरसन ||2|| यहो ये माटी के पुतरी ह दाई,माटी म मिल जाहु ||2|| जब तकRead More
  • बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार

    बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार  ।।2।। रुच मुच कसे हो सिंगार ।।2।। बारामास भवानी रुच मुच कसे हो सिंगार बारामास दाई बरन बरन के , चमके गहना गुरिया चमके गहना गुरिया हो मईया ।।2।। माह असाढ़ ऋतु छुनुर छुनुर दाई, बाह भर बाजे चुरिया बाह भर बाजे चुरिया हो मईया ।।2।। सावन ऋतुRead More
  • चइत के महीना दाई आबे मंझनी बोरे बासी संग म खवाहू तोला वो पताल चटनी

    https://youtu.be/58U7OiFJyb4 चइत के महीना दाई आबे मंझनी ।।2।। बोरे बासी संग म खवाहु तोला वो पाताल चटनी पताल चटनी दाई दाई पताल चटनी ।।2।। बोरे बासी संग म खवाहु तोला वो पताल चटनी ए चइत के महीना दाई आबे मंझनी बोरे बासी संग म खवाहु तोला वो पाताल चटनी पताल चटनी दाई दाई पताल चटनीRead More
  • छत्तीसगढ़ी हाना (कहावत)

    1. ‘कोस कोस म पानी बदलै, चार कोस म बानी।’ छत्तीसगढ़ी अर्थ- थोर थोर दुरिहा म पानी के सुवाद ह बदल जाथे – ओकर कुछ दुरिहा जाए ले बोली घलो बदल जाथे। (थोड़े-थोड़े दूर में पानी का स्वाद बदल जाता है-उससे कुछ दूर जाने पर बोली बदल जाती है।) 2. ‘नींदे कोड़े खेती, कोरे गाँथेRead More
  • ये नंदा जाहि का रे नंदा जाहि का रे नंदा जाहि का

    ये नंदा जाहि का रे नंदा जाहि का रे नंदा जाहि का कमरा अऊ खुमरी अरई तुतारी अरा ररा तता छू होत बिहनिया पखरा के आगी ,टेड़गा हे चोंगी टेड़गा हे पागी नोई झूले जस गर कस माला ,धरे कसेली दउड़त हे ग्वाला टेड़गा लऊड़ी ल बाखा दबाये, बंशी के धुन म धेनु चरइया नंदाRead More
  • चुन चुन फुलवा मंय लाने हावव ओ (छत्तीसगढ़ी लिरिक्स)

    चुन चुन फुलवा मंय लाने हावव ओ ||2|| भुवना ल दाई मंय सजाए हावव ओ ये नयना ल हे ओ दाई तोरे अगोरा ।।2।। खेलत आना कूदत आना झुपत आना ओ ||2|| बघवा म चढ़ के दाई मोरे जल्दी आना ओ गोबर लिपाये अंगना तुलसी मंय लगाए हव ।।2।। नो बाती दियना दाइ डेहरी तोरRead More
  • नौ दिन नवरात जागव वो दाई तोर जोत जलाव तोर झंडा चढ़ाव तोर पाँव पखारव वो

    नौ दिन नवरात जागव वो दाई तोर जोत जलाव तोर झंडा चढ़ाव तोर पाँव पखारव वो नौ दिन नवरात जागव वो दाई तोर जोत जलाव तोर झंडा चढ़ाव तोर पाँव पखारव वो नौ दिन उपास वो तोर जोत जलाव तोर झंडा चढ़ाव तोर पाँव पखारव वो सातों बहिनीया ल नेवता नेवतेव नेवतेव भैरों बाबा दुष्टनRead More
  • दाई तोर पइयाँ लागव वो

    https://youtu.be/Jwdmd3tYqjo मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न पइयाँ लागव वो दाई तोर पइयाँ लागव वो ।।2।। मोर दुर्गा दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न मोर इही दुलउरिन दाई के पइयाँ लागव न तोर दुवारी म अंधरा आवय कल्पत रोवय अंगना म वो कल्पत रोवय अंगनाRead More
  • महंगा लेले आरती ओ माय (छत्तीसगढ़ी लिरिक्स)

    मंहगा लेले आरती हो माँ ।।2।। खड़गा खप्पर धरे, सोलहो सिंगार करे ।।2।। बइठे हे आदि मोर भवानी महंगा लेले आरती हो माँ ।।2।। महंगा लेले आरती हो माँ ये झोफा झोफा फरे सुपारी,फर लागे नरियर के बारी ।2। केकती केवरा दांत दरुवन मोगरा फूल मंदार ओ महंगा लेले आरती हो माँ ।।2।। अन्न मRead More
  • दुर्गा दाई के अंगना म बोयेव जवारा (छत्तीसगढ़ी लिरिक्स)

    दुर्गा दाइ के अंगना म बोयेव जवारा महामाई के अंगना म बोयेव जवारा गाँव गली अउ शहर पहर म हो…।।2।। ये पारा ओ पारा … दुर्गा दाइ के अंगना म बोयेव जवारा ।।2।। महामाई के अंगना म बोयेव जवारा हरियर हरियर जवारा बोवाये दाई तोर दरस बर मय हर आयेव आ आ आ आ आRead More
  • तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव

    तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।। दुई नयना के बाती म ,आंसु म जोत जलातेव ।।2।। तोर दया होतिस त दाई जिभिया म कलसा सजातेव ।।2।। कृपा करथे कृपालु माता , छाती म बोतेव जवारा गंगा जल पानी के बदला, चरन म अंसुवन धारा तोर देवन तन ल माँ , नवRead More
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